Sunday, April 29, 2018

#33 Dreams


धूप से धुले हुएँ आँगन में दौड़ें यूँ

जैसे कोई पतंग उड़े चला बादलों को छू। 

और जब जब इस  धूप में होंसला लगे तपने, 

छाँव बन जातें है आकर सारे सपने

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